लॉक डाउन में मददगार साबित हुआ, डिजिडल इण्डिया की ओर एक कदम :ई-विन एैप : News & Features Network

लॉक डाउन में मददगार साबित हुआ, डिजिडल इण्डिया की ओर एक कदम :ई-विन एैप : News & Features Network

मुजफफरनगर। कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन से टीकाकरण स्थगित होने के कारण से स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी। इलैक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलीजेन्स नेटवर्क (ई-विन) प्रोग्राम इसमें काफी मददगार साबित हुआ है।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा0 राजीव निगम ने बताया कि जनपद में एक जिला स्तरीय व हर पी.एच.सी./सी.एच.सी पर एक, जिले में कुल 15 उपनगरीय कोल्ड चैन प्वाइन्ट हैं। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा यू.एन.डी.पी. के सहयोग से चलायी जा रही ई-विन एैप द्वारा सभी कोल्ड चैन में उपलब्ध यू.आई.पी. वैक्सीन की ऑन लाइन निगरानी की जाती है।

इसके लिए जिला स्तर पर एक वैक्सीन कौल्ड चैन मैनेजर व प्रत्येक उपनगरीय स्तर पर एक-एक कोल्ड चैन हैण्डलर नियुक्त किये गए हैं तथा सभी को भारत सरकार के द्वारा एक-एक मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराये गये हैं। ई-विन एैप के द्वारा टीके (वैक्सीन) की गुणवत्ता पर भी नज़र रखी जाती है। टीके (वैक्सीन) के सुरक्षित भण्डारण के लिए नियत तामपान की आवश्यकता होती है।

नियत तापमान में कमी या वृद्धि के कारण वैक्सीन की गुणवत्ता में कमी आने की सम्भावना बढ़ जाती है लेकिन ई-विन एैप की सहायता के कारण ये कार्य आसान हो गया है।

कोल्ड चैन में नियत तापमान में कमी या वृद्धि होने पर अलार्म बजने लगता है साथ ही इसकी सूचना कोल्ड चैन हैण्डलर/ मैनेजर से लेकर जिला प्रतिरक्षण अधिकारी तक को प्राप्त हो जाती है। ई-विन मोबाइल एप के माध्यम से टीके की उपलब्धता की अपडेट जानकारी मिलती है तथा वैक्सीन में कमी होने की दशा में तुरन्त पूर्ति की जाती है।

वहीं जिस वैक्सीन की अवसान तिथि (एक्सपायरी डेट) नज़दीक होती है पहले उसे प्रयोग में लिया जाता है। वैक्सीन कोल्ड चैन मैनेजर बतातें हैं कि वैक्सीन सुरक्षित रखने के लिए आई.एल.आर. (आइस लाइन रेफीजरैटर) का तापमान 2°C से 8°C रहता है तथा डी.एफ. (डीप फीजर) का तापमान -15°C से -25°C रहता है।

वहीं आइस पैक जमाने के लिए डी.एफ. का प्रयोग किया जाता है जिसकी सहायता से वैक्सीन को फील्ड में टीकाकरण के समय सुरक्षित रखने में सहायता मिलती है। यदि किसी कोल्ड चैन प्वाइन्ट पर कोल्ड चैन के तापमान में गिरावट आती है तो तुरन्त वैक्सीन इमरजेन्सी प्लान लागू कर वैक्सीन का सुरक्षित भण्डारण किया जाता है और इस तरह भारत सरकार की लाखों रूपये मूल्य की वैक्सीन को ससमय बचा लिया जाता है तथा सुरक्षित टीकाकरण कराया जाता है।

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