Big Reveals About Case Of Cheating Crores In The Name Of Recruitment – फर्जी भर्ती मामला: सेना से बर्खास्त पूर्व सैनिक है आरोपी, ऐसे युवाओं को बनाता है शिकार, महिला भी देती साथ

Big Reveals About Case Of Cheating Crores In The Name Of Recruitment – फर्जी भर्ती मामला: सेना से बर्खास्त पूर्व सैनिक है आरोपी, ऐसे युवाओं को बनाता है शिकार, महिला भी देती साथ

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कंवरपाल, हलवारा (लुधियाना)
Updated Sat, 18 Jul 2020 03:33 AM IST

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पंजाब के युवाओं को सेना में भर्ती का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोपी सेना से निकाला हुआ एक सैनिक है। इस शातिर ने केवल पंजाब नहीं बल्कि दो साल पहले अंबाला के पास एक गांव के युवाओं को ठगी का शिकार बनाया था। अमर उजाला की तरफ से जुटाई गई जानकारी में यह भी पता चला कि इस शातिर के साथ एक महिला भी शामिल है, जिसे वह सेना में बड़े पद पर डॉक्टर बताकर युवतियों को नर्स भर्ती करने का झासा देता था। 

गुरुवार को अमर उजाला ने हलवारा में सेना में भर्ती के नाम पर ठगी का खुलासा किया था। इस पूरी ठगी की कहानी अब दिलचस्प हो गई है। खुद को लेफ्टिनेंट कर्नल बताकर ठगी करने वाले संदीप सिंह गिल का असली नाम स्वर्ण सिंह है। वह लगभग चार साल पहले लुधियाना के जगरांव ब्रिज के पास मिलिट्री कैंप (152 TA बटालियन) में तैनात था। ठगी के आरोप में ही उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। 

जानकारी के अनुसार, लगभग चार साल पहले जब स्वर्ण सिंह सेना में था तो लुधियाना जिला कचहरी परिसर में ड्राइविंग लाइसेंस तथा कुछ अन्य दस्तावेजों को तैयार करने के लिए टाइपिस्ट दीपक कुमार से मिला। बातों-बातों में उसने पहले दीपक कुमार को सेना में भर्ती का लालच दिया। दीपक कुमार ने अपनी उम्र 34 साल होने का हवाला दिया तो आरोपी ने रसूख पर भर्ती करने की बात कही। लेकिन दीपक कुमार के अगले दो दांत टूटे हुए थे, इसलिए आरोपी ने उसे सेना में भर्ती करवाने से मना कर दिया। 

इसके बाद उसने दीपक से अन्य लोगों को भर्ती करवाने को कहा। दीपक कुमार ने उसे अपने दोस्त मनजीत सिंह से मिलवाया। स्वर्ण सिंह को जैसे पता चला कि मनजीत सिंह की पत्नी व बहन बीएससी नर्सिंग पास है तो उसने उन्हें सेना में बतौर नर्स भर्ती करवाने का दावा किया। तीनों की भर्ती के लिए 12 लाख रुपये की मांग रखी। डेढ़ लाख रुपये एडवांस लिया। 

मनजीत सिंह ने ही उसे आगे फल्लेवाल निवासी चन्न सिंह से मिलाया। इसके बाद एक के बाद एक युवक आरोपी के जाल में फंसते चले गए। सेना के सूत्रों के मुताबिक करीब दो साल पहले अंबाला का एक पूरा गांव मिलिट्री कैंप आ गया था। आरोपी ने उन्हें भी सेना में भर्ती करने का झासा दिया था।
 
फल्लेवाल और गुरुनानक स्टेडियम में होती थी ट्रेनिंग 
युवाओं से पैसा लेने के बाद शातिर उन्हें ट्रेनिंग भी देता था। इसके लिए गांव फल्लेवाल और लुधियाना के गुरुनानक स्टेडियम को चुना गया था। सेना की वर्दी में रहने वाला यह ठग सेना के अफसर की तरह रौब जमाता था। उन्हें टेस्ट के लिए बुलाता था लेकिन टेस्ट लेने की जगह उन्हें यह कह देता कि सेटिंग के चलते उन्हें पास करवा दिया गया है। इसके बाद वह युवाओं को सेना की वर्दी भी मुहैया करवाता था और कहता था कि बस वह पोस्टिंग के लिए तैयार रहें।

युवाओं से मिलने के लिए आरोपी एक इनोवा कार का प्रयोग करता था जिसे वह खुद ही चलाता था। हालांकि इनोवा पर लगा नंबर जाली है। ठगी के शिकार एक युवा ने बताया कि वह उसकी कार में बैठकर एक अन्य गांव गया था। उसने रास्ते में टोल टैक्स पर सेना का कार्ड दिखाया, उसे बिना किसी टोल के जाने दिया गया।

इससे भी उसे विश्वास हो गया कि वह सेना का अधिकारी है। वहीं आरोपी की इनोवा पर जो नंबर लगा था वह चरणजीत सिंह निवासी गांव रूड़का की गाड़ी का नंबर था। पुलिस ने जांच के बाद चरणजीत को थाने बुलाया। उन्होंने अपने बयान दर्ज करवाए कि उनकी गाड़ी उनके पास ही है। 

पंजाब के युवाओं को सेना में भर्ती का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोपी सेना से निकाला हुआ एक सैनिक है। इस शातिर ने केवल पंजाब नहीं बल्कि दो साल पहले अंबाला के पास एक गांव के युवाओं को ठगी का शिकार बनाया था। अमर उजाला की तरफ से जुटाई गई जानकारी में यह भी पता चला कि इस शातिर के साथ एक महिला भी शामिल है, जिसे वह सेना में बड़े पद पर डॉक्टर बताकर युवतियों को नर्स भर्ती करने का झासा देता था। 

गुरुवार को अमर उजाला ने हलवारा में सेना में भर्ती के नाम पर ठगी का खुलासा किया था। इस पूरी ठगी की कहानी अब दिलचस्प हो गई है। खुद को लेफ्टिनेंट कर्नल बताकर ठगी करने वाले संदीप सिंह गिल का असली नाम स्वर्ण सिंह है। वह लगभग चार साल पहले लुधियाना के जगरांव ब्रिज के पास मिलिट्री कैंप (152 TA बटालियन) में तैनात था। ठगी के आरोप में ही उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। 

जानकारी के अनुसार, लगभग चार साल पहले जब स्वर्ण सिंह सेना में था तो लुधियाना जिला कचहरी परिसर में ड्राइविंग लाइसेंस तथा कुछ अन्य दस्तावेजों को तैयार करने के लिए टाइपिस्ट दीपक कुमार से मिला। बातों-बातों में उसने पहले दीपक कुमार को सेना में भर्ती का लालच दिया। दीपक कुमार ने अपनी उम्र 34 साल होने का हवाला दिया तो आरोपी ने रसूख पर भर्ती करने की बात कही। लेकिन दीपक कुमार के अगले दो दांत टूटे हुए थे, इसलिए आरोपी ने उसे सेना में भर्ती करवाने से मना कर दिया। 

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