Ground Water Level Week Shamli

Ground Water Level Week Shamli

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कैराना के पास बहती यमुना नदी
– फोटो : SHAMLI

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शामली। गिरते भू जलस्तर से यमुना की गोद में जमीन की कोख सूखती जा रही है। पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गिरते भूजल स्तर से जिले के सभी ब्लाक डार्क श्रेणी में चले गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में रिचार्ज से ज्यादा पानी का दोहन हो रहा है। समूचा जिला डार्क श्रेणी में होने के कारण नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यदि समय रहते गिरते भूजल को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में इसका असर कृषि भूमि को प्रभावित करेगा। मुजफ्फरनगर जिले को काटकर बनाया शामली जिला यमुना नदी का अंतिम छोर तक बसा है। चार दशक पूर्व यहां कृषि क्षेत्र वाटर लांगड क्षेत्र था। फसलों का उच्च उत्पादन लेने के लिए नहरों के किनारे ड्रेनेज चैनलों का निर्माण किया गया। यमुना की गोद में जमीन की कोख सूखती जा रही है। जल के अत्याधिक दोहन के कारण जलस्तर नीचे जाने से राजकीय और प्राइवेट नलकूप बंद होते जा रहे हैं।
सरकारी रिपोर्ट के आधार पर भूजल स्तर गिरने से प्रतिवर्ष 0.4 मीटर से लेकर 1.0 मीटर प्रतिवर्ष हो रही है। भूजल स्तर स्तर अनुश्रवण आंकड़ों के अनुसार मेेेेेरठ में प्रतिवर्ष यह गिरावट 91 सेमी, गाजियाबाद में 79 सेमी, गौतमबुद्धनगर में 76 सेमी, दर्ज की गई है। वर्ष 2000, 2004, 2009, 2011 में किए गए भूजल उपलब्ध आंकलन की रिपोर्ट में बागपत जिले के बिनौली, सहारनपुर जिले के गंगोह नकुड़ अति दोहित क्रिटिकल श्रेणी में शामिल किए गए। इन वर्षों में भूजल उपलब्धता आंकलन में 13 अतिदोहित ब्लाक हैं। वार्षिक भूजल रिचार्ज के सापेक्ष 250 प्रतिशत पाई गई है। इनमें सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति शामली जिले के विकास खंड ऊन शामली और सहारनपुुर जिले के नकुड़ ब्लाक की है। यहां शामली जिले के ऊन और शामली ब्लाक की पर भूजल दोहन 334.20 प्रतिशत, 323.14 प्रतिशत, सहारनपुुर जिले की 260.28 आंकी गई है। मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना तहसील के गांवों में 30 मीटर से 36 मीटर तक भू जलस्तर गिरा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता आरके जैन का कहना है कि गिरते भूजल स्तर के कारण सरकारी हैंडपंप पहले 140- 150 फुट पर लगते थे, अब 220 फुट पर लगने लगे हैं। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके शुक्ला ने बताया कि भू जलस्तर गिरने से नलकूप की लागत बढ़ती जा रही है। पीने का पानी खारा होता जाने की संभावना है। वर्ष 2011 से लघु सिंचाई विभाग से नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
जिले में जलस्तर का आंकड़ा
ब्लाक गिरता जलस्तर मीटर में
शामली- क्रिटिकल- 26 मीटर
कैराना- अतिदोहित- 22 मीटर
ऊन — अतिदोहित- 23 मीटर
कांधला- अतिदोहित- 18 मीटर
थानाभवन- क्रिटिकल- 18 मीटर
जिले में जलस्तर का औसत : 22 से 27 मीटर का औसत
ब्लाक रिचार्ज- हेक्टेयर मीटर- ड्राफ्ट — हेक्टेयर प्रति मीटर
कैराना 3153.35 6971.12
कांधला 7518.51- 11028.76
शामली 11925.52- 11187.87
थानाभवन 8492.60- 7817.70
ऊन 84 61.16– 12076.65
कुल रिचार्ज– 4154914———– 49102.01

शामली। गिरते भू जलस्तर से यमुना की गोद में जमीन की कोख सूखती जा रही है। पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गिरते भूजल स्तर से जिले के सभी ब्लाक डार्क श्रेणी में चले गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में रिचार्ज से ज्यादा पानी का दोहन हो रहा है। समूचा जिला डार्क श्रेणी में होने के कारण नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यदि समय रहते गिरते भूजल को नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में इसका असर कृषि भूमि को प्रभावित करेगा। मुजफ्फरनगर जिले को काटकर बनाया शामली जिला यमुना नदी का अंतिम छोर तक बसा है। चार दशक पूर्व यहां कृषि क्षेत्र वाटर लांगड क्षेत्र था। फसलों का उच्च उत्पादन लेने के लिए नहरों के किनारे ड्रेनेज चैनलों का निर्माण किया गया। यमुना की गोद में जमीन की कोख सूखती जा रही है। जल के अत्याधिक दोहन के कारण जलस्तर नीचे जाने से राजकीय और प्राइवेट नलकूप बंद होते जा रहे हैं।

सरकारी रिपोर्ट के आधार पर भूजल स्तर गिरने से प्रतिवर्ष 0.4 मीटर से लेकर 1.0 मीटर प्रतिवर्ष हो रही है। भूजल स्तर स्तर अनुश्रवण आंकड़ों के अनुसार मेेेेेरठ में प्रतिवर्ष यह गिरावट 91 सेमी, गाजियाबाद में 79 सेमी, गौतमबुद्धनगर में 76 सेमी, दर्ज की गई है। वर्ष 2000, 2004, 2009, 2011 में किए गए भूजल उपलब्ध आंकलन की रिपोर्ट में बागपत जिले के बिनौली, सहारनपुर जिले के गंगोह नकुड़ अति दोहित क्रिटिकल श्रेणी में शामिल किए गए। इन वर्षों में भूजल उपलब्धता आंकलन में 13 अतिदोहित ब्लाक हैं। वार्षिक भूजल रिचार्ज के सापेक्ष 250 प्रतिशत पाई गई है। इनमें सर्वाधिक चिंताजनक स्थिति शामली जिले के विकास खंड ऊन शामली और सहारनपुुर जिले के नकुड़ ब्लाक की है। यहां शामली जिले के ऊन और शामली ब्लाक की पर भूजल दोहन 334.20 प्रतिशत, 323.14 प्रतिशत, सहारनपुुर जिले की 260.28 आंकी गई है। मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना तहसील के गांवों में 30 मीटर से 36 मीटर तक भू जलस्तर गिरा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता आरके जैन का कहना है कि गिरते भूजल स्तर के कारण सरकारी हैंडपंप पहले 140- 150 फुट पर लगते थे, अब 220 फुट पर लगने लगे हैं। लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके शुक्ला ने बताया कि भू जलस्तर गिरने से नलकूप की लागत बढ़ती जा रही है। पीने का पानी खारा होता जाने की संभावना है। वर्ष 2011 से लघु सिंचाई विभाग से नए नलकूप लगाने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

जिले में जलस्तर का आंकड़ा

ब्लाक गिरता जलस्तर मीटर में
शामली- क्रिटिकल- 26 मीटर
कैराना- अतिदोहित- 22 मीटर
ऊन — अतिदोहित- 23 मीटर
कांधला- अतिदोहित- 18 मीटर
थानाभवन- क्रिटिकल- 18 मीटर
जिले में जलस्तर का औसत : 22 से 27 मीटर का औसत
ब्लाक रिचार्ज- हेक्टेयर मीटर- ड्राफ्ट — हेक्टेयर प्रति मीटर
कैराना 3153.35 6971.12
कांधला 7518.51- 11028.76
शामली 11925.52- 11187.87
थानाभवन 8492.60- 7817.70
ऊन 84 61.16– 12076.65
कुल रिचार्ज– 4154914———– 49102.01

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