चंडीगढ़: गुरु के लंगर का कमाल, कोरोना संकट के बीच मुफ्त में किए 500 से ज्यादा ऑपरेशन

चंडीगढ़: गुरु के लंगर का कमाल, कोरोना संकट के बीच मुफ्त में किए 500 से ज्यादा ऑपरेशन

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आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Jul 2020 03:02 AM IST

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पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है। ऐसे में अन्य सभी बीमारियों के इलाज पीछे छूट गए हैं। ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर भी पिछले कई महीनों से बंद हैं। रुटीन की बजाय सिर्फ इमरजेंसी सर्जरी हो रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्ग मरीजों को है, जिनकी आंखों की सर्जरी होनी थी। ज्यादा देरी होने से सर्जरी का कोई फायदा नहीं होता लेकिन इस गंभीर संकट के बीच सेक्टर-18 स्थित गुरु के लंगर (आंखों का अस्पताल) ने पिछले दो महीनों में 500 से ज्यादा आंखों के ऑपरेशन कर एक मिसाल पेश की है। ये सभी ऑपरेशन मोतियाबिंद और रेटिना के हैं। यहां पर कोर्निया ट्रांसप्लांट भी होता है लेकिन कोरोना संकट की वजह से इसे टाल दिया गया है।

संस्था के मुख्य सेवादार हरजीत सिंह सब्बरवाल ने बताया कि कोरोना संकट की वजह से पीजीआई, मेडिकल कॉलेज समेत हरियाणा, पंजाब, यूपी व राजस्थान के भी सभी अस्पतालों में ऑपरेशन बंद हैं। इससे मरीज परेशान हैं और वे गुरु के लंगर में आ रहे हैं। हरियाणा-पंजाब से भी मरीज आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज को ऑपरेशन की तारीख अस्पतालों से मिली थी, मगर कोरोना की वजह से उनकी तारीख निकल चुकी है।

ऑपरेशन से पहले हर मरीज की कोविड से जांच
बताया गया है कि यहां पर आने के बाद मरीज की कोविड जांच की जाती है। इसके लिए एमडी मेडिसिन के डॉक्टर हैं। संदिग्ध होने पर लौटा भी देते हैं। पहले मरीज को तारीख दी जाती थी लेकिन अब एक दो दिन में डेट देकर ऑपरेशन कर दे रहे हैं। अस्पताल में टच फ्री सैनिटाइजर मशीन और टनल लगी है। इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मरीज की एंट्री होती है। सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष पालन करना होता है। इसके लिए वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई है। सर्जरी के लिए दो ओटी का ऑड-ईवन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ऑपरेशन से पहले और बाद में उसे अच्छी तरह से सैनिटाइज करते हैं।

गुरु के लंगर में ऑपरेशन के लिए मरीजों से पैसे नहीं लिए जाते। यहां तक कैश काउंटर तक नहीं बनाया गया है। मरीज आता है और पर्ची कटाते ही उसका इलाज शुरू हो जाता है। मुख्य सेवादार सब्बरवाल के मुताबिक अभी तो पेशेंट बाहर से नहीं आ रहे हैं। बाहर से आने वाले पेशेंट यदि बस या ट्रेन का टिकट दिखाते हैं तो उन्हें आने-जाने का खर्च भी दिया जाता है।

ऑपरेशन के दौरान रुकने का भी इंतजाम संस्था की ओर से कराया जाता है। रेटिना के ऑपरेशन में पीजीआई में करीब 50-60 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि यहां पर एक भी रुपया नहीं लिया जाता। दावा किया गया कि रेटिना के ऑपरेशन में पीजीआई जो मशीन का इस्तेमाल करता है, वही मशीन गुरु के लंगर में इस्तेमाल की जाती है। एक मशीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। गुरु के लंगर में दो मशीने हैं, जो दानियों ने दान की है।

लॉकडाउन में अस्पताल बंद रहा तो दस लाख लोगों को खिलाया लंगर 
मुख्य सेवादार सब्बरवाल के मुताबिक लॉकडाउन शुरू होने से करीब डेढ़ से दो महीने अस्पताल बंद रहा। मगर इस दौरान भी सेवादार अपने काम में जुटे रहे। करीब दस लाख लोगों को लंगर खिलाया। कालोनियों में एक लाख सेनेटेरी पैड बांटे। पीपीई किट, मास्क व सैनिटाइजर का कोई हिसाब नहीं। कोरोना संकट के दौरान मेडिकल कॉलेज में एसी बंद कर दिए गए थे। वहां पंखों की आवश्यकता पड़ी तो 100 से ज्यादा पंखे भी दिए गए।

पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है। ऐसे में अन्य सभी बीमारियों के इलाज पीछे छूट गए हैं। ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर भी पिछले कई महीनों से बंद हैं। रुटीन की बजाय सिर्फ इमरजेंसी सर्जरी हो रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन बुजुर्ग मरीजों को है, जिनकी आंखों की सर्जरी होनी थी। ज्यादा देरी होने से सर्जरी का कोई फायदा नहीं होता लेकिन इस गंभीर संकट के बीच सेक्टर-18 स्थित गुरु के लंगर (आंखों का अस्पताल) ने पिछले दो महीनों में 500 से ज्यादा आंखों के ऑपरेशन कर एक मिसाल पेश की है। ये सभी ऑपरेशन मोतियाबिंद और रेटिना के हैं। यहां पर कोर्निया ट्रांसप्लांट भी होता है लेकिन कोरोना संकट की वजह से इसे टाल दिया गया है।

संस्था के मुख्य सेवादार हरजीत सिंह सब्बरवाल ने बताया कि कोरोना संकट की वजह से पीजीआई, मेडिकल कॉलेज समेत हरियाणा, पंजाब, यूपी व राजस्थान के भी सभी अस्पतालों में ऑपरेशन बंद हैं। इससे मरीज परेशान हैं और वे गुरु के लंगर में आ रहे हैं। हरियाणा-पंजाब से भी मरीज आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज को ऑपरेशन की तारीख अस्पतालों से मिली थी, मगर कोरोना की वजह से उनकी तारीख निकल चुकी है।

ऑपरेशन से पहले हर मरीज की कोविड से जांच

बताया गया है कि यहां पर आने के बाद मरीज की कोविड जांच की जाती है। इसके लिए एमडी मेडिसिन के डॉक्टर हैं। संदिग्ध होने पर लौटा भी देते हैं। पहले मरीज को तारीख दी जाती थी लेकिन अब एक दो दिन में डेट देकर ऑपरेशन कर दे रहे हैं। अस्पताल में टच फ्री सैनिटाइजर मशीन और टनल लगी है। इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मरीज की एंट्री होती है। सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष पालन करना होता है। इसके लिए वालंटियरों की ड्यूटी लगाई गई है। सर्जरी के लिए दो ओटी का ऑड-ईवन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ऑपरेशन से पहले और बाद में उसे अच्छी तरह से सैनिटाइज करते हैं।


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ऑपरेशन के नहीं लगते हैं पैसे, कैश काउंटर तक नहीं

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