Haryana Government Released Orders Regarding Vehicles For Illegal Mining – हरियाणाः अवैध माइनिंग में लगे वाहनों, उपकरणों को सीज व रिलीज करने के संदर्भ में आदेश जारी

Haryana Government Released Orders Regarding Vehicles For Illegal Mining – हरियाणाः अवैध माइनिंग में लगे वाहनों, उपकरणों को सीज व रिलीज करने के संदर्भ में आदेश जारी

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हरियाणा में अवैध माइनिंग में लगे वाहनों पर और शिकंजा कसने के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है। सरकार ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ पूरी सख्ती बरत रही है। इसी संदर्भ में सरकार ने अवैध माइनिंग में लगे वाहनों व उपकरणों को सीज करने और उन्हें रिलीज करने के संदर्भ में आदेश जारी किए हैं। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट कर दिया है की अवैध माइनिंग करने वाले वाहन मालिकों द्वारा एनजीटी के आदेशानुसार लगाए गए हर्जाने और जुर्माने को चुकाए बिना निचली अदालतें भी वाहनों को रिलीज नहीं करेंगी।

यह हर्जाना यह मानते हुए लगाया जाएगा की अवैध माइनिंग में लगे वाहनों और उपकरणों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। उधर, सरकार द्वारा जारी आदेशों के तहत अवैध माइनिंग में संलिप्त पाए गए वाहनों और उपकरणों के मालिक हर्जाना और जुर्माना लगने के बाद महानिदेशक माइनिंग एंड जियोलॉजी हरियाणा के समक्ष उनके वाहन व उपकरण सीज करने वाले संबंधित माइनिंग अफसर के आदेशों के खिलाफ अपील कर सकते हैं। महानिदेशक के फैसले को भी विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष चैलेंज किया जा सकता है।

मगर इस सारी प्रक्रिया के दौरान करीब एक महीना भी लग सकता है। तब तक वाहन मालिकों के लोडेड वाहन सीज होकर ज़िला माइनिंग विभाग की निगरानी में खड़े रहते थे। लोडेड वाहनों की वजह से न केवल वाहनों के टायरों को नुकसान पहुंचता था, बल्कि लोडेड माल को भी नुकसान होने की आशंका रहती थी। अब सरकार ने आदेश जारी किया है कि एनजीटी के तहत लगाए गए जुर्माने और हर्जाने की रकम यदि वाहन मालिक विभाग में जमा करवा देते हैं और उसके बाद अपील में भी चले जाते हैं, तब भी उनके वाहन व उपकरण तुरंत रिलीज कर दिया जाएंगे।

अपील का फैसला यदि वाहन मालिकों के हक में आ जाता है, तो उनका जुर्माना और हर्जाना भी उन्हें रिफंड कर दिया जाएगा। मगर अपील में जो केस सेटल हो चुके हैं और वाहन पहले ही कंपाउंड हो चुके हैं। उन पर यह आदेश लागू नहीं होंगे।
सरकार ने आदेश जारी कर माइनिंग में लगे वाहन चालकों को थोड़ी राहत भी दी है। अब माइनिंग में लगे वाहनों द्वारा ई- रवाना बिल जनरेट करने के बाद अब अपने शुरुआती स्थान से गंतव्य तक पहुंचने में जितना समय लगता है, उसमें प्रति घंटा 10 मिनट ग्रेस टाइम दिया जाएगा। दरअसल, ई-रवाना की व्यवस्था इसलिए की गई है। ताकि माइनिंग में लगे संबंधित वाहनों पर निगरानी रखी जा सके। पहले एक वाहन एक फेरे के परमिट पर अवैध रूप से भी कई फेरे अवैध खनन के लिए लगा देता था।

मगर अब ई-रवाना ऐसा ट्रैकिंग सिस्टम है कि वाहन को निर्धारित समय पर अपने शुरुआती प्वाइंट से गंतव्य तक पहुंचना होगा। मगर सरकार के पास इस तरह के कुछ मामले पहुंच रहे थे। जिसमें वाहन किसी तकनीकी दिक्कत, रोड साइड चेकिंग, ड्राइवर की ढील, मौसम की खराबी व अन्य किसी जायज कारण की वजह से गंतव्य स्थान तक पहुंचने में लेट हो जाते थे।

ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था। इन बातों पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने अब यह फैसला किया है कि वाहन द्वारा गंतव्य स्थान तक पहुंचने में जितना भी समय लगेगा। उसमें लेट होने के कुछ जायज कारण मानते हुए प्रति घंटा 10 मिनट ग्रेस पीरियड दिया जाएगा।

सार

  • एनजीटी का हर्जाना चुकाए बिना निचली अदालत सुपरदारी पर नहीं छोड़ पाएंगी वाहन
  • अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को पहले एनजीटी के आदेशानुसार देना होगा हर्जाना
  • अब हर्जाना जमा करवा फैसला आने से पहले वाहन रिलीज भी करवा सकेगा मालिक

विस्तार

हरियाणा में अवैध माइनिंग में लगे वाहनों पर और शिकंजा कसने के लिए सरकार पूरी तरह गंभीर है। सरकार ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ पूरी सख्ती बरत रही है। इसी संदर्भ में सरकार ने अवैध माइनिंग में लगे वाहनों व उपकरणों को सीज करने और उन्हें रिलीज करने के संदर्भ में आदेश जारी किए हैं। दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट कर दिया है की अवैध माइनिंग करने वाले वाहन मालिकों द्वारा एनजीटी के आदेशानुसार लगाए गए हर्जाने और जुर्माने को चुकाए बिना निचली अदालतें भी वाहनों को रिलीज नहीं करेंगी।

यह हर्जाना यह मानते हुए लगाया जाएगा की अवैध माइनिंग में लगे वाहनों और उपकरणों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। उधर, सरकार द्वारा जारी आदेशों के तहत अवैध माइनिंग में संलिप्त पाए गए वाहनों और उपकरणों के मालिक हर्जाना और जुर्माना लगने के बाद महानिदेशक माइनिंग एंड जियोलॉजी हरियाणा के समक्ष उनके वाहन व उपकरण सीज करने वाले संबंधित माइनिंग अफसर के आदेशों के खिलाफ अपील कर सकते हैं। महानिदेशक के फैसले को भी विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष चैलेंज किया जा सकता है।

मगर इस सारी प्रक्रिया के दौरान करीब एक महीना भी लग सकता है। तब तक वाहन मालिकों के लोडेड वाहन सीज होकर ज़िला माइनिंग विभाग की निगरानी में खड़े रहते थे। लोडेड वाहनों की वजह से न केवल वाहनों के टायरों को नुकसान पहुंचता था, बल्कि लोडेड माल को भी नुकसान होने की आशंका रहती थी। अब सरकार ने आदेश जारी किया है कि एनजीटी के तहत लगाए गए जुर्माने और हर्जाने की रकम यदि वाहन मालिक विभाग में जमा करवा देते हैं और उसके बाद अपील में भी चले जाते हैं, तब भी उनके वाहन व उपकरण तुरंत रिलीज कर दिया जाएंगे।

अपील का फैसला यदि वाहन मालिकों के हक में आ जाता है, तो उनका जुर्माना और हर्जाना भी उन्हें रिफंड कर दिया जाएगा। मगर अपील में जो केस सेटल हो चुके हैं और वाहन पहले ही कंपाउंड हो चुके हैं। उन पर यह आदेश लागू नहीं होंगे।


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ई-रवाना बिल पर अब प्रति घंटा 10 मिनट का मिलेगा ग्रेस टाइम

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