Hindi Is The Foundation Of Our Culture And Values – हिसार के शिक्षाविद् बोले- हमारी संस्कृति और संस्कारों की बुनियाद है हिंदी

Hindi Is The Foundation Of Our Culture And Values – हिसार के शिक्षाविद् बोले- हमारी संस्कृति और संस्कारों की बुनियाद है हिंदी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
Updated Sun, 16 Aug 2020 05:40 PM IST

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देश में बढ़ते पश्चिमी संस्कृति के प्रकोप से हिंदी का दम घुट रहा है। वो भाषा जो हमारी संस्कृति और संस्कारों की बुनियाद थी, आज धीरे-धीरे हाशिए पर जा रही है। ऐसे में हमें अंग्रेजी भाषा का मोह छोड़कर फिर से मन में हिंदी को जिंदा करना होगा। यही वो भाषा है, जो इंसान को इंसान से जोड़े रखती है। हमारे दिमाग में जो विचार हिंदी में आते हैं, उन्हें जुबान से हम अक्सर अंग्रेजी का रूप दे देते हैं। ऐसे में आज फिर के प्रोत्साहन की आवश्यकता है। बच्चों को युवाओं को हमें हिंदी साहित्य के प्रति जागरूक करना होगा।

हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन हिंदी को लोगों ने दिलों से उतार दिया है। हमें हिंदी को सही मायने में मातृभाषा का दर्जा देना होगा, हिंदी में लिखना, बोलना, पढ़ना और व्यवहार में लाना होगा। आज अंग्रेजी बोलने वालों को अधिक बुद्धिमान समझा जाता है। ये माहौल हमने ही बनाया है, लेकिन देर-सवेर अपनी गलती का अहसास होने के बाद अब हमें जाग जाना चाहिए। अमर उजाला की हिंदी को प्रोत्साहन देने की मुहिम निश्चित तौर पर लोगों को हमारी हिंदी, हमारी संस्कृति से जोड़ेगी। हिंदी ही है जो हमें सामने वाले के भावों को एक पंक्ति में समझा सकती है। – सीमा सोलंकी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कोहली।

हम हिंदी भाषा की उन्नति के लिए दिन-रात राग अलापते रहते हैं। लेकिन उसके व्याकरण पर कोई बल नहीं देता, जो उसकी रीढ़ है। बिना व्याकरण के हमारी भाषा अपंग है, अशक्त है। समृद्ध भाषा के लिए समृद्ध व्याकरण का होना बहुत अनिवार्य है। हम आधुनिक काल के साहित्यकार आचार्य महावीर प्रसाद के ऋणी हैं, जिनके काल में हिंदी भाषा व्याकरण की कसौटी पर खरी उतरी व उसी भाषा को आज का विद्यार्थी अपने शोध का विषय बना रहा है। आज का साहित्यकार उसको अपनी रचना में सम्मान दे रहा है। लेकिन साथ ही जरूरी है कि आम जनता के बीच इसे लोकप्रिय बनाया जाए। अमर उजाला की इस हिंदी की लोकप्रियता बढ़ाने की मुहिम की तारीफ की जानी चाहिए। – सियानंद टेकना, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खरबला खेड़ा, हिसार।

देश में बढ़ते पश्चिमी संस्कृति के प्रकोप से हिंदी का दम घुट रहा है। वो भाषा जो हमारी संस्कृति और संस्कारों की बुनियाद थी, आज धीरे-धीरे हाशिए पर जा रही है। ऐसे में हमें अंग्रेजी भाषा का मोह छोड़कर फिर से मन में हिंदी को जिंदा करना होगा। यही वो भाषा है, जो इंसान को इंसान से जोड़े रखती है। हमारे दिमाग में जो विचार हिंदी में आते हैं, उन्हें जुबान से हम अक्सर अंग्रेजी का रूप दे देते हैं। ऐसे में आज फिर के प्रोत्साहन की आवश्यकता है। बच्चों को युवाओं को हमें हिंदी साहित्य के प्रति जागरूक करना होगा।

हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन हिंदी को लोगों ने दिलों से उतार दिया है। हमें हिंदी को सही मायने में मातृभाषा का दर्जा देना होगा, हिंदी में लिखना, बोलना, पढ़ना और व्यवहार में लाना होगा। आज अंग्रेजी बोलने वालों को अधिक बुद्धिमान समझा जाता है। ये माहौल हमने ही बनाया है, लेकिन देर-सवेर अपनी गलती का अहसास होने के बाद अब हमें जाग जाना चाहिए। अमर उजाला की हिंदी को प्रोत्साहन देने की मुहिम निश्चित तौर पर लोगों को हमारी हिंदी, हमारी संस्कृति से जोड़ेगी। हिंदी ही है जो हमें सामने वाले के भावों को एक पंक्ति में समझा सकती है। – सीमा सोलंकी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कोहली।

हम हिंदी भाषा की उन्नति के लिए दिन-रात राग अलापते रहते हैं। लेकिन उसके व्याकरण पर कोई बल नहीं देता, जो उसकी रीढ़ है। बिना व्याकरण के हमारी भाषा अपंग है, अशक्त है। समृद्ध भाषा के लिए समृद्ध व्याकरण का होना बहुत अनिवार्य है। हम आधुनिक काल के साहित्यकार आचार्य महावीर प्रसाद के ऋणी हैं, जिनके काल में हिंदी भाषा व्याकरण की कसौटी पर खरी उतरी व उसी भाषा को आज का विद्यार्थी अपने शोध का विषय बना रहा है। आज का साहित्यकार उसको अपनी रचना में सम्मान दे रहा है। लेकिन साथ ही जरूरी है कि आम जनता के बीच इसे लोकप्रिय बनाया जाए। अमर उजाला की इस हिंदी की लोकप्रियता बढ़ाने की मुहिम की तारीफ की जानी चाहिए। – सियानंद टेकना, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खरबला खेड़ा, हिसार।

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