Ipl Spot-fixing Petitioner Aditya Verma Says He Will Support Cooling-off Period Waiver For Sourav Ganguly, Jay Shah – गांगुली-शाह कार्यकाल का विरोध नहीं करेगा बिहार क्रिकेट संघ, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

Ipl Spot-fixing Petitioner Aditya Verma Says He Will Support Cooling-off Period Waiver For Sourav Ganguly, Jay Shah – गांगुली-शाह कार्यकाल का विरोध नहीं करेगा बिहार क्रिकेट संघ, सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई

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स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 21 Jul 2020 10:20 PM IST

सौरव गांगुली और जय शाह
– फोटो : social media

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) स्पॉट फिक्सिंग के याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने मंगलवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह की विराम अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) को हटाने के मसले पर जब उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए आएगा तो उनका वकील इसका विरोध नहीं करेगा।

शीर्ष अदालत में बीसीसीआई की अपने संविधान में संशोधन करने तथा गांगुली और शाह को अनिवार्य विराम अवधि पर जाने के बजाय अपने पद पर बने रहने को लेकर दायर की गयी याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।

बिहार क्रिकेट संघ (सीएबी) के सचिव वर्मा 2013 स्पॉट फिक्सिंग मामले के मूल याचिकाकर्ता हैं। इसी के बाद उच्चतम न्यायालय ने लोढ़ा पैनल का गठन किया जिसकी सिफारिशों पर दुनिया के सबसे धनी बोर्ड के संविधान में आमूलचूल सुधार किए गए।

बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार राज्य संघ या बोर्ड में छह साल के कार्यकाल के बाद तीन साल की विराम अवधि पर जाना अनिवार्य है। गांगुली और शाह ने पिछले साल अक्तूबर में पदभार संभाला था और तब उनके राज्य और राष्ट्रीय इकाई में छह साल के कार्यकाल में केवल नौ महीने बचे थे।

वर्मा ने कहा कि बोर्ड में स्थायित्व के लिए गांगुली और शाह का बने रहना जरूरी है। वर्मा ने पीटीआई से कहा, ‘मैं शुरू से कहता रहा हूं कि सौरव गांगुली बीसीसीआई की अगुवाई करने के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति हैं। मेरा मानना है कि बीसीसीआई में स्थायित्व के लिए दादा और जय शाह का पूरे कार्यकाल तक बने रहना जरूरी है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर दादा बीसीसीआई अध्यक्ष पद बने रहते हैं तो मैं सीएबी की तरफ से उनका विरोध नहीं करूंगा। इन नौ महीनों से चार महीने पहले ही कोरोना वायरस के कारण गंवा दिये गये हैं तथा किसी भी प्रशासक को अपनी योजनाओं और नीतियों को लागू करने के समय चाहिए होता है।’ गांगुली के छह साल इस महीने के आाखिर में पूरे होंगे जबकि माना जा रहा है कि शाह ने कार्यकाल पूरा कर लिया है।

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) स्पॉट फिक्सिंग के याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने मंगलवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह की विराम अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) को हटाने के मसले पर जब उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए आएगा तो उनका वकील इसका विरोध नहीं करेगा।

शीर्ष अदालत में बीसीसीआई की अपने संविधान में संशोधन करने तथा गांगुली और शाह को अनिवार्य विराम अवधि पर जाने के बजाय अपने पद पर बने रहने को लेकर दायर की गयी याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।

बिहार क्रिकेट संघ (सीएबी) के सचिव वर्मा 2013 स्पॉट फिक्सिंग मामले के मूल याचिकाकर्ता हैं। इसी के बाद उच्चतम न्यायालय ने लोढ़ा पैनल का गठन किया जिसकी सिफारिशों पर दुनिया के सबसे धनी बोर्ड के संविधान में आमूलचूल सुधार किए गए।

बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार राज्य संघ या बोर्ड में छह साल के कार्यकाल के बाद तीन साल की विराम अवधि पर जाना अनिवार्य है। गांगुली और शाह ने पिछले साल अक्तूबर में पदभार संभाला था और तब उनके राज्य और राष्ट्रीय इकाई में छह साल के कार्यकाल में केवल नौ महीने बचे थे।

वर्मा ने कहा कि बोर्ड में स्थायित्व के लिए गांगुली और शाह का बने रहना जरूरी है। वर्मा ने पीटीआई से कहा, ‘मैं शुरू से कहता रहा हूं कि सौरव गांगुली बीसीसीआई की अगुवाई करने के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति हैं। मेरा मानना है कि बीसीसीआई में स्थायित्व के लिए दादा और जय शाह का पूरे कार्यकाल तक बने रहना जरूरी है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर दादा बीसीसीआई अध्यक्ष पद बने रहते हैं तो मैं सीएबी की तरफ से उनका विरोध नहीं करूंगा। इन नौ महीनों से चार महीने पहले ही कोरोना वायरस के कारण गंवा दिये गये हैं तथा किसी भी प्रशासक को अपनी योजनाओं और नीतियों को लागू करने के समय चाहिए होता है।’ गांगुली के छह साल इस महीने के आाखिर में पूरे होंगे जबकि माना जा रहा है कि शाह ने कार्यकाल पूरा कर लिया है।

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