Job offers to players but the medalists disappointed before 2016 know full story | खिलाड़ियों को नौकरी की सौगात, लेकिन 2016 के पहले वाले मेडलिस्ट निराश, जाने पूरी कहानी

Job offers to players but the medalists disappointed before 2016 know full story | खिलाड़ियों को नौकरी की सौगात, लेकिन 2016 के पहले वाले मेडलिस्ट निराश, जाने पूरी कहानी

जयपुर: प्रदेश सरकार की ओर से खेल के क्षेत्रों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नौकरी देने की शुरूआत की. खेल विभाग की ओर से इस पहल को मूर्त रूप देते हुए जुलाई तक मैडल प्राप्त खिलाड़ियों से आवेदन भी लिए और अब तीन वर्गों में इनको नौकरी देने की पूरी तैयारी भी कर ली गई है, लेकिन ये नौकरियां दी जा रही है सिर्फ 2016 के बाद मैडल विजेता खिलाड़ियों को. ऐसे में अब 2016 से पूर्व के पदक विजेता खिलाड़ियों ने भी बिना पारी नियुक्ति नियम 2017 में शामिल करने की मांग तेज की है.

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सरकार द्वारा दी जा रही नियुक्तियों में विभाग की ओर से तीन वर्ग बनाए गए हैं, जिसमें पदक विजेता के वर्ग को वर्गीकृत करते हुए नौकरी योग्यता शर्तें रखी गई है. इसके लिए वर्ग ए,वर्ग बी और वर्ग सी का निर्धारण किया गया है, लेकिन 2016 से पहले के पदक विजेताओं ने जब शामिल करने की मांग रखी. रोल बॉल में 2011 वर्ल्ड कप सिल्वर मैडलिस्ट, 2011 एशियन गोल्ड मैडलिस्ट और महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्डी रमेश सिंह का कहना है कि “जो शर्तें निर्धारित की गई उनमें 2016 के बाद महज 40 से 50 खिलाड़ी ही योग्यता रखते हैं. ऐसे में यदि इसका दायरा 2009 तक बढ़ाया जाता है तो इतने ही ओर खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा जिन्होंने प्रदेश का नाम रोशन किया है.”

तो दूसरी ओर केन्या में 2013 में आयोजित रोल बाल वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए आदित्य राठौड़ ने गोल्ड मैडल जीतकर ना सिर्फ भारत का नाम रोशन किया साथ ही राजस्थान का भी गौरव बढ़ाया. आदित्य राठौड़ का कहना है कि “देश और प्रदेश के लिए 2013 में गोल्ड मैडल जीता,,लेकिन जब नौकरी की बारी आई तो 2016 से बाद के खिलाड़ियों को सम्मान मिल रहा है. ऐसे में सरकार को 2016 से पहले के खिलाड़ियों के बारे में भई सोचना चाहिए,.”

कुछ ऐसी ही पीड़ा सॉफ्ट बाल में सीनियर नेशनल गोल्ड मैडल जीतने वाले राहुल तंवर की है. राहुल तंवर का कहना है कि साल 2009 में गोल्ड मैडल जीता, लेकिन उसके बाद से 11 साल का समय बीत चुका है, लेकिन खेल विभाग उनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है. अगर खिलाड़ियों को नौकरी का तोहफा दिया जा रहा है. तो फिर प्रदेश के नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की ओर क्यूं नहीं देखा जा रहा है. अब अगर नौकरी की तोहफा लेट मिल रहा है तो फिर उम्र की बाध्यता से भी राहत देनी चाहिए.

बहरहाल, खेल मंत्री अशोक चांदना ने आउट ऑफ टर्न अपाइंटमेंट विनर्स नियम (संशोधन) 2020 में संशोधन को लेकर राज्य सरकार को पत्र भी लिख दिया है, लेकिन अभी तक इस पत्र का राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आने से अब खिलाड़ियों की चिंताएं भी बढ़ने लगी है.

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