जुलाई में नकारात्मक 0.58 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति

जुलाई में नकारात्मक 0.58 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति

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सरकार ने जुलाई माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी कर दिए हैं। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में नकारात्मक 0.58 फीसदी हुई, जो जून में नकारात्मक 1.81 फीसदी थी। वहीं पिछले साल यानी जुलाई 2019 में यह 1.17 फीसदी थी।

 

खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई के दौरान 4.08 फीसदी थी। यह आंकड़ा जून में 2.04 फीसदी था। हालांकि, जुलाई में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति घटकर 9.84 फीसदी रह गई, जो इससे पिछले महीने में 13.60 फीसदी थी। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति जुलाई में 0.51 फीसदी थी, जो जून में 0.08 फीसदी थी। आरबीआई ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखते हुए कहा था कि मुद्रास्फीति का जोखिम बना हुआ है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि अक्तूबर-मार्च की अवधि में खुदरा मुद्रास्फीति कुछ नरम पड़ेगी।

इतनी रही खुदरा मुद्रास्फीति
इससे पहले सरकार ने खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए। खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 6.93 फीसदी हो गई। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से महंगाई दर बढ़ी है। बृहस्पतिवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले जून महीने में मुद्रास्फीति 6.23 फीसदी थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आंकड़े के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई महीने में 9.62 फीसदी रही, जबकि इससे पूर्व जून माह में यह 8.72 फीसदी थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊपर रही है। 

सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार फीसदी के स्तर पर रखने की जिम्मेदारी दी है। रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर ही गौर करता है।

सरकार ने जुलाई माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी कर दिए हैं। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में नकारात्मक 0.58 फीसदी हुई, जो जून में नकारात्मक 1.81 फीसदी थी। वहीं पिछले साल यानी जुलाई 2019 में यह 1.17 फीसदी थी।

 

खाद्य वस्तुओं की महंगाई जुलाई के दौरान 4.08 फीसदी थी। यह आंकड़ा जून में 2.04 फीसदी था। हालांकि, जुलाई में ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति घटकर 9.84 फीसदी रह गई, जो इससे पिछले महीने में 13.60 फीसदी थी। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति जुलाई में 0.51 फीसदी थी, जो जून में 0.08 फीसदी थी। आरबीआई ने पिछले सप्ताह अपनी नीतिगत समीक्षा में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखते हुए कहा था कि मुद्रास्फीति का जोखिम बना हुआ है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि अक्तूबर-मार्च की अवधि में खुदरा मुद्रास्फीति कुछ नरम पड़ेगी।

इतनी रही खुदरा मुद्रास्फीति
इससे पहले सरकार ने खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए। खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 6.93 फीसदी हो गई। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से महंगाई दर बढ़ी है। बृहस्पतिवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले जून महीने में मुद्रास्फीति 6.23 फीसदी थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आंकड़े के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई महीने में 9.62 फीसदी रही, जबकि इससे पूर्व जून माह में यह 8.72 फीसदी थी। यह लगातार दूसरा महीना है जब खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊपर रही है। 

सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति दो फीसदी घट-बढ़ के साथ चार फीसदी के स्तर पर रखने की जिम्मेदारी दी है। रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर ही गौर करता है।

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