Public upset due to stamp shortage in Jaipur | जयपुर: स्टांप की किल्लत से जनता परेशान, अटके सबके काम

Public upset due to stamp shortage in Jaipur | जयपुर: स्टांप की किल्लत से जनता परेशान, अटके सबके काम

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जयपुर: लॉक डाउन खुलने के बाद से जुलाई माह में मकानों, भूखंडों, फ्लैटों की रजिस्ट्री बढ़ने से स्टाम्प की मांग बढ़ गई. डेढ माह से जयपुर में 50 से लेकर 15 हजार रुपए तक के स्टाम्प की कमी चल रही है. इससे लोगों के पंजीयन व मुद्रांक शुल्क विभाग के कार्यों में देरी हो रही है. लोगों को स्टाम्प के लिए भटकना पड़ता है. 

स्टाम्प पेपर का भवन-भूखंडों की रजिस्ट्री के अलावा वसीयत, एग्रीमेंट, जाती प्रमाण पत्र, ई डब्ल्यूएस, मूलनिवास, किराया नामा में उपयोग किया जाता है. कलेक्ट्रेट के अलावा आरटीओ जेडीए, तहसीलों में स्टांप का उपयोग होता है. जिले में चार हजार स्टाम्प विक्रेता है और प्रतिदिन करीब 5 करोड रुपए के स्टांप की बिक्री होती है. 

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स्टाम्प की किल्लत से जिले के उपखंड के लोगों को अधिक परेशानी हो रही है. लॉकडाउन के चलते स्टांप पेपर की सप्लाई कम हो गई थी, लेकिन लॉक खुलने के डेढ माह बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए. कलेक्ट्रेट स्थित जयपुर ट्रेजरी सप्ताह में दो दिन स्टाम्प का वितरण कर रही है. ट्रेजरी को स्टाम्प वितरण के लिए 3 दिन खोलने को कहा हुआ है, लेकिन स्टाम्प की कमी के चलते दो ही दिन खोला जा रहा है.

स्टांप लेने वालों को बैंक में रुपए जमा कराने के बाद भी स्टाम्प लेने के लिए 4 से 5 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है. पीएचईडी और बिजली विभाग, पीडब्ल्यूडी के अलावा सरकारी टेंडर में भी ई-ग्रास से स्टाम्प ड्यूटी जमा को मान्यता नहीं दी जाती. जिससे भी स्टाम्प की जरूरत बढ़ जाती है. पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग जयपुर डीआईजी प्रथम प्रतिभा पारिक का कहना है कि जून माह में अचानक मांग बढ़ने से समस्या खड़ी हुई है. लॉक डाउन होने के बाद से सप्लाई को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं. मांग के अनुसार हर सप्ताह राजस्व विभाग अजमेर से स्टाम्प आते हैं, जल्दी ही हालात सामान्य हो जाएंगे.

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