Sugarcane Crop Getting Affected Due To Sulfur Deficiency

Sugarcane Crop Getting Affected Due To Sulfur Deficiency

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शामली  गन्ने की फसल के बारे में  जानकारी लेते वैज्ञानिक

शामली गन्ने की फसल के बारे में जानकारी लेते वैज्ञानिक
– फोटो : SHAMLI

शामली। गन्ने की फसल में ज्यादा यूरिया का प्रयोग करने से बीस प्रतिशत सल्फर की कमी पाए जाने से पौधे की उपज में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। पौधा पेड़ी गन्ने की फसल में सल्फर का ज्यादा प्रयोग से उपज की बढ़ोत्तरी होगी।
शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर विकास मलिक के मुताबिक सल्फर के अभाव में गन्ने के पौधे पीले, हल्के पतले, आकार के छोटे हो जाते हैं। गन्ने के पौधे का तना पतला और सख्त हो जाता है। नई पत्तियां हल्के हरे रंग की पड़ जाती है, बाद में पुरानी पत्तियां भी हल्के हरे और बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती हैं। जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सुचारु नहीं हो पाती है। जिससे गन्ने की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शामली में मोनोकल्चर के चलते फसल चक्र का प्रयोग न करने के कारण जमीन में कुछ पोषक तत्वों की कमी बढ़ती जा रही है। गन्ने की फसल में बीस प्रतिशत सल्फर की कमी पाई गई है, जो एक प्रकार से असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग की श्रेणी में भी आता है। जिले में किसान यूरिया (नत्रजन) का अधिक प्रयोग करते हैं। जिस कारण से पौधे में सल्फर की कमी हो जाती है। इसी कारण अधिक नाइट्रोजन युक्त फसलों में सल्फर की कमी के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। भूमि आवश्यकता के अनुसार पौधों में सल्फर की कमी पूरी नहीं कर पाती है। सल्फर पौधों की जड़ों की बढ़वार के लिए मुख्य रूप से सहायक होता है। विभिन्न कोशिकाओं के विभाजन में भी इस तत्व की भूमिका होती है। इसलिए गन्ने में पौधा और पेड़ी में दोनों फसलों में सल्फर की नितांत आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में सल्फर का प्रयोग करने से रोगरोधी क्षमता भी पैदा होती है तथा उपज में बढ़ोतरी होती है। सल्फर का संतुलित प्रयोग किया जाए तो उपज में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पाई गई है। गन्ने की फसल में मिट्टी में सल्फर की कमी को दूर करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट जिप्सम या सल्फर मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक होता है। भूमि में प्रत्येक वर्ष सल्फर का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए।
– किसान सल्फर की कमी को कैसे पूरा करें
शामली। जिले में टिटौली, लपराना, गोहरनी, मुंडेट,करोडी, काबड़ौत, बरला, हसनपुर, बनत, जलालपुर, चौसाना आदि गांवो में किसान गन्ने की फसल एवं खेतों में मिट्टी में सल्फर की कमी को दूर करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट जिप्सम या सल्फर मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग करें। मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक होता है।

शामली। गन्ने की फसल में ज्यादा यूरिया का प्रयोग करने से बीस प्रतिशत सल्फर की कमी पाए जाने से पौधे की उपज में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। पौधा पेड़ी गन्ने की फसल में सल्फर का ज्यादा प्रयोग से उपज की बढ़ोत्तरी होगी।

शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर विकास मलिक के मुताबिक सल्फर के अभाव में गन्ने के पौधे पीले, हल्के पतले, आकार के छोटे हो जाते हैं। गन्ने के पौधे का तना पतला और सख्त हो जाता है। नई पत्तियां हल्के हरे रंग की पड़ जाती है, बाद में पुरानी पत्तियां भी हल्के हरे और बैंगनी रंग की दिखाई देने लगती हैं। जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सुचारु नहीं हो पाती है। जिससे गन्ने की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शामली में मोनोकल्चर के चलते फसल चक्र का प्रयोग न करने के कारण जमीन में कुछ पोषक तत्वों की कमी बढ़ती जा रही है। गन्ने की फसल में बीस प्रतिशत सल्फर की कमी पाई गई है, जो एक प्रकार से असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग की श्रेणी में भी आता है। जिले में किसान यूरिया (नत्रजन) का अधिक प्रयोग करते हैं। जिस कारण से पौधे में सल्फर की कमी हो जाती है। इसी कारण अधिक नाइट्रोजन युक्त फसलों में सल्फर की कमी के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। भूमि आवश्यकता के अनुसार पौधों में सल्फर की कमी पूरी नहीं कर पाती है। सल्फर पौधों की जड़ों की बढ़वार के लिए मुख्य रूप से सहायक होता है। विभिन्न कोशिकाओं के विभाजन में भी इस तत्व की भूमिका होती है। इसलिए गन्ने में पौधा और पेड़ी में दोनों फसलों में सल्फर की नितांत आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में सल्फर का प्रयोग करने से रोगरोधी क्षमता भी पैदा होती है तथा उपज में बढ़ोतरी होती है। सल्फर का संतुलित प्रयोग किया जाए तो उपज में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पाई गई है। गन्ने की फसल में मिट्टी में सल्फर की कमी को दूर करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट जिप्सम या सल्फर मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक होता है। भूमि में प्रत्येक वर्ष सल्फर का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए।

– किसान सल्फर की कमी को कैसे पूरा करें

शामली। जिले में टिटौली, लपराना, गोहरनी, मुंडेट,करोडी, काबड़ौत, बरला, हसनपुर, बनत, जलालपुर, चौसाना आदि गांवो में किसान गन्ने की फसल एवं खेतों में मिट्टी में सल्फर की कमी को दूर करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट जिप्सम या सल्फर मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग करें। मिश्रित उर्वरकों का प्रयोग लाभदायक होता है।

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