Vice President Of India Venkaiah Naidu Says Fight Prejudice Against Covid-19 Patients And End It – कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार में भेदभाव से उपराष्ट्रपति आहत, कहा- पूर्वाग्रह को खत्म करें

Vice President Of India Venkaiah Naidu Says Fight Prejudice Against Covid-19 Patients And End It – कोरोना मरीजों के अंतिम संस्कार में भेदभाव से उपराष्ट्रपति आहत, कहा- पूर्वाग्रह को खत्म करें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 26 Jul 2020 10:18 PM IST

उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू
– फोटो : ANI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें

उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कोविड-19 मरीजों को अपमानित करने और इस वायरस के कारण जान गंवाने वालों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार से इंकार करने की घटनाओं पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरी तरह अवांछित हैं और स्थानीय लोगों एवं समाज से आग्रह किया कि ऐसी घटनाएं अब नहीं दोहराई जाएं। एक फेसबुक पोस्ट में नायडू ने कहा, ‘समय की मांग है कि हम पूर्वाग्रह से लड़ें और इसे जड़ से समाप्त करें। अन्यथा, यह फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं से भी अधिक विषैला हो सकता है।’

नागरिकों से कोविड-19 मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह याद रखा जाना चाहिए कि कोई भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और अदृश्य वायरस किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।’

नायडू ने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि अनंतकाल से ही भारत को सहिष्णुता की भूमि के रूप में जाना जाता है और संकट का सामना कर रहे लोगों की सहायता करने के लिए लोग सहानुभूति दिखाते रहे हैं।

उन्होंने मीडिया में आयी उन खबरों को ‘परेशान’ करने वाला करार दिया, जिसमें कुछ लोग वायरस संक्रमण की चपेट में आने के डर के कारण कोविड-19 मरीजों के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं। कई बार ऐसा व्यवहार करने वाले लोगों में मरीजों के रिश्तेदार भी शामिल होते हैं।

उप राष्ट्रपति ने उन खबरों का भी हवाला दिया, जहां लोगों ने इस वायरस के कारण जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए स्थान उपलब्ध कराने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कोविड-19 मरीजों को अपमानित करने और इस वायरस के कारण जान गंवाने वालों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार से इंकार करने की घटनाओं पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरी तरह अवांछित हैं और स्थानीय लोगों एवं समाज से आग्रह किया कि ऐसी घटनाएं अब नहीं दोहराई जाएं। एक फेसबुक पोस्ट में नायडू ने कहा, ‘समय की मांग है कि हम पूर्वाग्रह से लड़ें और इसे जड़ से समाप्त करें। अन्यथा, यह फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं से भी अधिक विषैला हो सकता है।’

नागरिकों से कोविड-19 मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह याद रखा जाना चाहिए कि कोई भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और अदृश्य वायरस किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।’

नायडू ने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि अनंतकाल से ही भारत को सहिष्णुता की भूमि के रूप में जाना जाता है और संकट का सामना कर रहे लोगों की सहायता करने के लिए लोग सहानुभूति दिखाते रहे हैं।

उन्होंने मीडिया में आयी उन खबरों को ‘परेशान’ करने वाला करार दिया, जिसमें कुछ लोग वायरस संक्रमण की चपेट में आने के डर के कारण कोविड-19 मरीजों के साथ अनुचित व्यवहार करते हैं। कई बार ऐसा व्यवहार करने वाले लोगों में मरीजों के रिश्तेदार भी शामिल होते हैं।

उप राष्ट्रपति ने उन खबरों का भी हवाला दिया, जहां लोगों ने इस वायरस के कारण जान गंवाने वाले लोगों के अंतिम संस्कार के लिए स्थान उपलब्ध कराने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।

Source link

Related articles

Leave a Reply