हिन्दू धर्म की आलोचना करते हुए अंग्रेजों ने कहा “ये लोग कैसे हैं..


हिन्दू धर्म की आलोचना करते हुए अंग्रेजों ने कहाये लोग कैसे हैं कि ३६५ दिनों में १६६० व्रत पर्व मनाते हैं…?

विवेचना के अभाव में हिन्दू समाज चुप रहा धीरे धीरे उन लोगों ने इसका लाभ उठाते हुए आज एक हजार से अधिक “डे” घोषित कर दिया अब हम उत्तर मांगते है कि ३६५ दिनों में एक हजार से अधिक “डे” की क्या आवश्यकता पड़ गई…?

आचार्य से अनेक तेजस्वी स्नातकों ने पूछा कि,

यदि मातृनवमी थी तो मदर्स डे क्यों लाया गया…?
यदि कौमुदी महोत्सव था तो वेलेंटाइन डे क्यों लाया गया…?
यदि गुरुपूर्णिमा थी तो टीचर्स डे क्यों लाया गया…?
यदि धन्वन्तरि जयन्ती थी तो डाक्टर्स डे क्यों लाया गया…?
यदि विश्वकर्मा जयंती थी तो प्रद्यौगिकी दिवस क्यों लाया…?
यदि सन्तान सप्तमी थी तो चिल्ड्रेन डे क्यों लाया गया…?
यदि नवरात्रि और कंजिका भोज था तो डॉटर्स डे क्यों लाया…?

आचार्य ने कहा – संस्कृति विस्मरण और रूपांतरण के लिए छोटी चीजें, अश्रेष्ठ संस्कृति लाई गई इसका एक ही उपाय है अपनी जड़ों की ओर लौटें।

सनातन धर्म के अनेक नारे विश्व में प्रसिद्ध हो रहे हैं जैसे वसुधैव कुटुम्बकम्, सत्यमेव जयते, द्यौः शान्तिः, संगच्छध्वम् संवद्ध्वं, धर्म-क्षेत्रे कुरु-क्षेत्रे, अतिथि देवो भव, मातृदेवो भव, पितृदेवो भव आदि क्योंकि इनकी भीतरी भावना अद्भुत है आज यूरोप और अमेरिका के अनेक विद्वान वहाँ की प्राचीन सभ्यताओं और देवियों को ढूंढ रहे हैं…!

हिंदुत्व विचार…!!!

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